दिल्ली में मेरे पास कोर्ट का आदेश है फिर भी जल बोर्ड वाले तत्काल जल आपूर्ति यानि मीटर नहीं लगा रहे

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सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी,
महाशय,
मैं आपका ब्यस्त ध्यान निम्नलिखित मार्मिक तथ्यों की ओर आकृष्ट कराना बेहद ही प्रशंगिक समझता हूँ, मैं कन्दर्प नारायण मान्धाता, पिता- श्री प्रह्लाद पाण्डेय, घर- C-३०, तीसरा तल, पटेल नगर, नई दिल्ली-११०००८ का निवासी हूँ, मैं करीब ८ सालो से यहाँ रह रहा हूँ , मेरा मकान मालिक दर्शन लाल चावला ने मुझसे कुछ पैसे लिया था जिसके ऐवज मे वो मुझे मुच्चुअल रेंटअग्रीमेंट दिया था, अब वो दुनिया में नहीं रहा, जब वो मर गया तो उसके मरने के २ महीने बाद अपने पैसे मैं माँगा तो देने से इनकार कर दिया और उसकी बीबी रमण चावला ने बोला माकन ख़ाली करदो अन्यथा तुम सभी को जान से मार दुंगी और बच्चो को उठवा लूंगी, मैंने पैसे की बात कही तो रमण चावला और उसका वकील पुलकित डीन्डोना ने मेरी बिजली और पानी का आपूर्ति काट दिया जबकि मैं ३ सालो से बिजली का बिल भर रहा था और पानी का पैसा उनलोग खुद ले रहे थे और मैंने भी एक साल का बिल भरा है, परन्तु उनलोगों ने बिजली पानी नहीं दिया तब मैंने कोर्ट का सहारा लिया, अब माननीय जज साहब के आदेश से बिजली तो लग गया, परन्तु पानी के लिए कोर्ट का आदेश है परन्तु राजिंदर नगर जल बोर्ड में कार्यरत श्रीमती नीलम चोपड़ा और महाशय मित्तल दोनों २ महीने से दौरा रहे है और उनलोगों को जब आर्डर दिखता हूँ तो कहते है की यह तो जल बोर्ड है यहाँ ऐसे पानी की कनेक्शन नहीं लगता है जब तक हम लोगो को खुश नहीं करोगे तब तक कोर्ट का आदेश ले कर घूमते रहो, मैंने दस से बीस चक्कर कट चूका परन्तु ये जल बोर्ड वाले नहीं सुनते.
क्या देश की आजादी अभी बाकि है चार महीने से मेरे पास पानी नहीं है बाज़ार से पानी खरीद कर पीता हूँ और छोटे बच्चो को पिलाता हूँ, क्या कोर्ट का आदेश मानने वाला आपका विभाग नहीं है या इन सरकारी नौकरों की शासन प्रणाली
क्या मुझे तत्काल पानी की सुविधा मुहैया नहीं करा सकते, सुना हूँ की यह लोकतंत्र हैं परन्तु ये तो लगता कोई और तंत्र.
आपका विश्वासी
कन्दर्प नारायण मान्धाता

दिल्ली में मेरे पास कोर्ट का आदेश है फिर भी जल बोर्ड वाले तत्काल जल आपूर्ति यानि मीटर नहीं लगा रहे
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