दिल्ली विश्वविद्यालय का पक्षपात

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अप्रत्यक्ष घुस की शुरुआत:-
दिल्ली विश्वविद्यालय का पक्षपात:- क्या दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर के महाविद्यालय उत्तर और दक्षिणी परिसर के महाविद्यालयों अलग है, अगर नहीं है तो फिर क्यों उनके साथ भेदभाव किया जाता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय जहां हर भारतीय यूवा की खवाहिश होती है की वह अपनी विद्यालय की शिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह प्रवेश मिल जाये! जिसके लिए विद्याथियों को काफी अच्छे अंक भी प्राप्त करने होते है! परन्तु अब वह ऐसी व्यवस्थाओ ने जन्म लेने शुरू कर दिया है की यदि आपके काम से काम अंक भी होगे तो भी आप वह प्रवेश ले सकते हो वो भी उसकी अच्छी से अच्छी शाखा में जिसके लिए आपके अंक नहीं मायने रखे बल्कि आपकी जेब कितनी भारी है यह बात मायने रखेगी! अर्थात कुछ वर्षो से दिल्ली विश्वविद्यालय में भी प्रत्यक्ष रूप से घुस लेकर बच्चो का फर्जी दाखला किया जाता है जिसमे छात्रा संघ से लेकर वी.सी. तक की अप्रोच लगाये जाती है
इस प्रकार फर्जी दाखिले में नीचे से लेकर ऊपर के अधिकारियो तक लाखो की श्रेणी में छात्रों की परिजनों से घुस ली जाती है! इस घुस प्रक्रिया के कारण कुछ सालो से हर उन सामान्य विद्याथियों पर भी प्रभाव पड़ने लगा है जो इससे काफी दूर दूर तक रहते थे जो निम्न प्रकार है:-
१) बेवजह किसी न किसी कारण का हवाला देकर महाविद्यालय दुवारा अच्छे से अच्छे अंक वाले विद्याथियों का दाखिला न लेना!
२) दाखिला लेने के बाद यदि कोई समस्या आती है तो उसमे प्राचार्य दुवारा कोई मुख्य रूप में सहयोग ना करना!
३) दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर के महाविद्यालय के विद्याथियों के साथ उत्तर और दक्षिणी परिसर महाविद्यालयों के मुखबले भेधभाव करना!
इसके आलावा दो तीन वर्षो से दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर के महाविद्यालय में एक नए पक्षपात ने जन्म ले लिया है की अंतिम वर्ष के विद्याथियों के साथ बहुत अब्द धोका किया जाता है अर्थात उन्हें किसी एक पेपर में बेवजह फ़ैल कर दिया जाता है जिसके कई कारण है :-
१) दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर और दक्षिणी परिसर के महाविद्यालयों के छात्रों के लिए स्नातकोत्तर में दाखिले के लिए रिक्त स्थान किया जा सके और परिसर से बाहर के महाविद्यालय के छात्रों का बोझ काम किया जा सके ! जिसके लिए जांचकर्ता को पूर्व सूचित कर दिया जाता है की वो परिसर से बाहर के महाविद्यालय के छत्रो किसी एक पेपर में असफल कर दे जिससे वो आगे के प्रवेश में दाखिला के लिए आयोग्य हो जाये!
इस प्रक्रिया को पूर्ण करने लिए 2015 के दिल्ली विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम में अंतिम वर्ष के छात्रों, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर के महाविद्यालय के विद्यार्थी है उन्हें एक ही पेपर जिसका नाम “समकालीन भारत में समाजशास्त्र” में 95% विद्यार्थियों को फ़ैल कर दिया गया जिसमे शिवाजी महाविद्यालय, लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, दौलत राम महाविद्यालय आदि शामिल है जो की फ़ैल कर दिया गया क्योंकि वो दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर और दक्षिणी परिसर के महाविद्यालयों में नहीं आते है! यदि उन फ़ैल छात्रों का अन्यो पपेरो के अंक देखे जाये तो समग्र रूप में 60 % से काम अंक नही होगे फिर भी एक पेपर में फ़ैल होने के कारण वो आगे किसी अन्य परीक्षा या दाखिले के लिए अयोग्य हो चुके है! कई सरे विद्यार्थियों ने म.ए, लॉ , आई.आई.टी, मॉस कम्युनिकेशन आदि के पवेश परीक्षा को उत्तीर्ण कर दिया है परन्तु अब वो इन विषयो में प्रवेश नहीं ले सकते बस इसलिए क्योंकि एक पेपर में वो फ़ैल है जिसने पूर्ण वर्ष के लिए उन्हें आयोग्य बना दिया है जिनकी उन विद्यार्थियों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी जो निम्न प्रकार है:-
१) एक पूरा साल बर्वाद
२) उनके दुवारा पास प्रवेश परीक्षा का व्यर्थ में चला जाना
३)विद्यार्थियों पर और आर्थिक दवाब का पड़ना
! पेपर पूर्ण जाँच भी करवाना चाहे तो उसमे समय इतना अधिक लगेगा की उसका को सफल फयदा नहीं है और तो और करवाना भी चाहे तो उसकी फीस इतनी हाई है की कई विद्यार्थी करवा भी नहीं सकते और यह एक प्रकार का दिल्ली विश्वविद्यालय का अप्रत्यक्ष घुस लेने का तरीका है की बच्चो को किसी एक पेपर में फ़ैल कर दो और जाँच के फिर उससे 1000 रूपए ऐठ लो! दिल्ली विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र भी है जो अपनी फीस भी ढंग से जमा नही करवा पाते है तो वो प्रकार के अन्य आर्थिक दवाब को कैसे झेल पायेगे इसके दो परिणाम ही निकल सकते है एक तो वो छात्र अपनी पढाई बीच में छोड़ देंगे या दूसरा वो कर्ज लेकर अपनी शिक्षा पूर्ण शुरू करेंगे!
४) दिल्ली के बहार के राज्यों के भी बच्चे दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने आते पर अजब उनके साथ अंतिम वर्ष में ऐसी घटना घाट जाती है तो भी या तो अपनी पढाई बीच में छोड़ देते या तो अपने परिवार पर एक आर्थिक बोझ बन जाते है!
इन सब समस्याओ की शुरुआत उन जांचकर्ताओं से होती है जो पेपर जाँच करते वक्त यह भूल जाते है की इसमें किसी बच्चे का भविष्य नह बल्कि 28 रूपए है! ऐसे अधिकारी जो ज्यादा अधिक पैसो के चक्कर में भी बच्चो के पेपर को सही रूप में जाँच नहीं करते है और जैसे तैसे अंक प्रदान कर देते है जो विद्याथियों के भविष्य के लिए अभिशाप बन जाता है! इसी प्रकार की गलत जाँच 2014 में भी हुई थी जिस कारण दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर के महाविद्यालय के विद्याथियों को काफी संख्या में फ़ैल किया गया था और उनकी उठाई गए आवाज को दवा दिया गया था परन्तु इस बार ऐसा नहीं होगा ! क्योंकि विद्याथी बिना किसी छात्र संघ की मदद के इस गलत प्रक्रिया को बदल कर रहेंगे चाहे इसके लिए कोई क्रांतिकारी कदम ही क्यों न उठाना पड़े!
My name is TRILOK SINGH
Shivaji college Delhi university
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