भूमि अवाप्ति में दोहरे मापदण्ड

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१९८३ में पानेरियों की मादडी,उदयपुर के किसानो की १७५ बीघा भूमि राजस्थान आवासन मंडल की अवाप्ति में डाली. पडोसी गाँव भुवाना की भूमि १९९० में तो जयपुर के प्रथ्विराज नगर की ११०० बीघा १९८८ में अवाप्ति में डाली. तीनो आवप्तियाँ में सामान परिस्थतिया.राज.सरकार ने २००६ में भुवाना के किसानो को निशुल्क भू समर्पण के बदले २५ प्रतिशत विकसित भूमि दी तो अभी २५.८.२०१४ को उदयपुर में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जयपुर के प्रथ्विराज नगर के किसानो कोभी २५ प्रतिशत भूमि दे दी पर पानेरियों की मादडी के किसान जिनका भू अवाप्ति प्रकरण उक्त दोनों प्रकरणों के सामान होने व इनसे अधिक पुराना(१९८३) होने के बावजूद उन्हें निःशुल्क भूमि समर्पण के बदले २५ प्रतिशत विकसित भूमि देने का आदेश राजस्थान सरकार नहीं दे रही. क्योकि ये छोटे व् सीमान्त व् बिना पहुँच वाले गरीब किसान है. यह भेद भाव क्यों?

भूमि अवाप्ति में दोहरे मापदण्ड
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